जलालुद्दीन रूमी: मैं दुखी क्यों होऊं? मेरे वजूद का हर भाग पूर्ण रूप से खिला हुआ है।

मैं दुखी क्यों होऊं? मेरे वजूद का हर भाग पूर्ण रूप से खिला हुआ है। — जलालुद्दीन रूमी

मैं दुखी क्यों होऊं? मेरे वजूद का हर भाग पूर्ण रूप से खिला हुआ है।

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