चाणक्य कौटिल्य: धर्म-विरुद्ध पाप का प्रसार अधर्म का कारण है ।

धर्म-विरुद्ध पाप का प्रसार अधर्म का कारण है । — चाणक्य कौटिल्य

धर्म-विरुद्ध पाप का प्रसार अधर्म का कारण है ।

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