महात्मा गांधी: सेवा करने का भाव यदि स्वार्थ से रहित हो तो वह पूजा बन जाती है (स्रोत: सत्य के प्रयोग, महात्मा गांधी (1927))

सेवा करने का भाव यदि स्वार्थ से रहित हो तो वह पूजा बन जाती है (स्रोत: सत्य के प् — महात्मा गांधी

सेवा करने का भाव यदि स्वार्थ से रहित हो तो वह पूजा बन जाती है (स्रोत: सत्य के प्रयोग, महात्मा गांधी (1927))

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