बेंजामिन फ्रैंकलिन: मानव सुख, कभी-कभार मिलने वाले बड़े सौभाग्य से उतना नहीं, जितना कि रोजाना मिलने वाले छोटे-छोटे लाभों से।

मानव सुख, कभी-कभार मिलने वाले बड़े सौभाग्य से उतना नहीं, जितना कि रोजाना मिलने व — बेंजामिन फ्रैंकलिन

मानव सुख, कभी-कभार मिलने वाले बड़े सौभाग्य से उतना नहीं, जितना कि रोजाना मिलने वाले छोटे-छोटे लाभों से।

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