अलेक्सांद्र पूश्किन: मेरे सपने, मेरे सपने! उनकी मिठास कहाँ चली गई? मेरी जवानी का आखिर क्या हुआ?

मेरे सपने, मेरे सपने! उनकी मिठास कहाँ चली गई? मेरी जवानी का आखिर क्या हुआ? — अलेक्सांद्र पूश्किन

मेरे सपने, मेरे सपने! उनकी मिठास कहाँ चली गई? मेरी जवानी का आखिर क्या हुआ?

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