स्वामी विवेकानन्द: तमाम संसार हिल उठता। क्या करूँ धीरे-धीरे अग्रसर होना पड रहा है। तूफ़ान मचा दो तूफ़ान!

तमाम संसार हिल उठता। क्या करूँ धीरे-धीरे अग्रसर होना पड रहा है। तूफ़ान मचा दो तू — स्वामी विवेकानन्द

तमाम संसार हिल उठता। क्या करूँ धीरे-धीरे अग्रसर होना पड रहा है। तूफ़ान मचा दो तूफ़ान!

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