चाणक्य कौटिल्य: (उदाहरणार्थ) क्रोध पीने के बदले उसे क्रोध को अपने मुख से बाहर निकाल देना चाहिए ।

(उदाहरणार्थ) क्रोध पीने के बदले उसे क्रोध को अपने मुख से बाहर निकाल देना चाहिए । — चाणक्य कौटिल्य

(उदाहरणार्थ) क्रोध पीने के बदले उसे क्रोध को अपने मुख से बाहर निकाल देना चाहिए ।

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