चाणक्य कौटिल्य: मन का जैसा शरीर (हृष्ट-पुष्ट, सुंदर-कुरूप तथा छोटा-मोटा) होता है, वैसा ही ज्ञान अर्थात मस्तिष्क का विकास होता है ।

मन का जैसा शरीर (हृष्ट-पुष्ट, सुंदर-कुरूप तथा छोटा-मोटा) होता है, वैसा ही ज्ञान  — चाणक्य कौटिल्य

मन का जैसा शरीर (हृष्ट-पुष्ट, सुंदर-कुरूप तथा छोटा-मोटा) होता है, वैसा ही ज्ञान अर्थात मस्तिष्क का विकास होता है ।

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