आर्थर शोपेनहावर: कुछ न होता तो अच्छा होता। चूँकि पृथ्वी पर सुख से बढ़कर दुख है, इसलिए हर संतोष क्षणभंगुर है, नई इच्छाएं और नए संकट पैदा क

कुछ न होता तो अच्छा होता। चूँकि पृथ्वी पर सुख से बढ़कर दुख है, इसलिए हर संतोष क् — आर्थर शोपेनहावर

कुछ न होता तो अच्छा होता। चूँकि पृथ्वी पर सुख से बढ़कर दुख है, इसलिए हर संतोष क्षणभंगुर है, नई इच्छाएं और नए संकट पैदा करता है, और खाए गए जानवर की पीड़ा हमेशा भक्षक के सुख से कहीं अधिक होती है।

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