कार्ल मार्क्स: धर्म मानव मस्तिष्क जो न समझ सके उससे निपटने की नपुंसकता है।

धर्म मानव मस्तिष्क जो न समझ सके उससे निपटने की नपुंसकता है। — कार्ल मार्क्स

धर्म मानव मस्तिष्क जो न समझ सके उससे निपटने की नपुंसकता है।

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