ब्लेज़ पास्कल: मैंने पाया है कि मनुष्यों के सारे दुख एक ही तथ्य से उत्पन्न होते हैं, कि वे अपने कक्ष में चुपचाप नहीं रह सकते।

मैंने पाया है कि मनुष्यों के सारे दुख एक ही तथ्य से उत्पन्न होते हैं, कि वे अपने — ब्लेज़ पास्कल

मैंने पाया है कि मनुष्यों के सारे दुख एक ही तथ्य से उत्पन्न होते हैं, कि वे अपने कक्ष में चुपचाप नहीं रह सकते।

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