फ्रेडरिक नीत्शे: मुक्ति की मुहर क्या है? स्वयं के सामने शर्मिंदा ना होना।

मुक्ति की मुहर क्या है? स्वयं के सामने शर्मिंदा ना होना। — फ्रेडरिक नीत्शे

मुक्ति की मुहर क्या है? स्वयं के सामने शर्मिंदा ना होना।

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