चाणक्य कौटिल्य: धूर्त व्यक्ति अपने स्वार्थ के लिए दूसरों की सेवा करते हैं।

धूर्त व्यक्ति अपने स्वार्थ के लिए दूसरों की सेवा करते हैं। — चाणक्य कौटिल्य

धूर्त व्यक्ति अपने स्वार्थ के लिए दूसरों की सेवा करते हैं।

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