चाणक्य कौटिल्य: बुद्धिमत् मनुष्य शत्रु को भी मित्र बना लेता है ।

बुद्धिमत् मनुष्य शत्रु को भी मित्र बना लेता है । — चाणक्य कौटिल्य

बुद्धिमत् मनुष्य शत्रु को भी मित्र बना लेता है ।

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