चाणक्य कौटिल्य: बिना धन के कोई काम करने की सोचना बालू में तेल निकालने के समान है ।

बिना धन के कोई काम करने की सोचना बालू में तेल निकालने के समान है । — चाणक्य कौटिल्य

बिना धन के कोई काम करने की सोचना बालू में तेल निकालने के समान है ।

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