अल्बर्ट आइंस्टीन: नज़रिए की कमज़ोरी चरित्र की कमज़ोरी बन जाती है।

नज़रिए की कमज़ोरी चरित्र की कमज़ोरी बन जाती है। — अल्बर्ट आइंस्टीन

नज़रिए की कमज़ोरी चरित्र की कमज़ोरी बन जाती है।

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